बारिश तो बादलो से होती है,आसमानो मे क्या रक्खा है आग तो चिंगारी से लगती है,सूरज मे क्या रक्खा है दिल बेकाबू हो ता है मेरा,कयामत मे बोहोत,कयामत तो आपकी जुलफे बिखेरती है,अंधियो मे क्य रक्खा है
सबृ करो अभी महनत जारी है,वक्त खुद कहेगा अब तेरी बारी है ।
तूफान ज्यादा होतो कश्तियां भी डूब जाती हैं,अगर घमंड ज्यादा होतो हसतियां भी डूब जाती हैं
तराशिये खुद को कुछ इस कदर जहां मे,पाने वा ले को नाज और खोने वाले को अफसोस रहे